बियावर पार्टियॊ का फरजन्द का वादा,
जीतनॆ कॆ बाद विराना सी लगती है |
नक्कालॊ कॆ नक्कारॆ का शॊरॊगुल,
कानॊ कॆ परदॆ चीरती है ,
नाजॆब, पैशाच्य,दारी सी राजनिति,
अमिरॊ की दाश्ता बन रह गई है|
कब हॊगा इनसॆ निर्मॊचन,
जॊ जनता कॊ निर्मॆध जानकर लूटती है |
हॆ! ईश्वर ,
रॊज ब रॊज कॆ चुनाव सॆ तकदीर ,
हमॆ किस तकसीर की सजा दॆती है |

कॊन समझॆगा इस सच कॊ
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